Chairman's Message

छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी राजनांदगाँव में स्थित हमारा विद्यालय वर्तमान में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। संस्कार युक्त परिवेश में हमारा विद्यालय नई पीढ़ी का सृजन करने के लिए संकल्पित है। अपने सत्रह वर्ष के सफर में विद्यालय ने जो मुकाम हासिल किया है, वह पालको शिक्षको व प्रबंध समिति के पदाधिकारियों के समर्पण व परिश्रम का ही परिणाम है। हमारे विद्यालय की ख्याति न केवल छत्तीसगढ़ में बल्कि उड़ीसा, झारखण्ड, प.बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र आदि राज्यों में फैली है। यहाँ इन राज्यों के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त करते है। ”आसमां के आगे एक और भी जहाँ है“ और हमें उसे प्राप्त करना है हम इस लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम निरंतर प्रयासरत हैं और निश्चित रूप से हम इसे प्राप्त करेंगे। इसका हमें पूर्ण विश्वास है।

आज के प्रतियोगी युग में सी.बी.एस.ई ने पूरे छत्तीसगढ़ के अनेक विद्यालयों में से सी.बी.एस.ई (आई) के लिए सर्वप्रथम युगांतर को चुना, क्योंकि यहाँ आधुनिक शिक्षा की सभी सुविधाएँ उपलब्ध है। जैसे-स्मार्ट क्लास, टच स्क्रीन बोर्ड, काॅन्फ्रेंस क्लास, जी लर्न, विभिन्न प्रयोगशालाएँ आदि।

इतना ही नहीं, संगीत व नृत्य की शिक्षा के लिए संस्था को विश्व स्तरीय इंदिरा कला व संगीत विश्वविद्यालय खैैरागढ़ से जोड़ा गया है। इसकी अलग से शिक्षा उन विद्यार्थियों को दी जाती है, जो इन कलाओं में रुचि रखते हैं।

इसके अलावा छात्र व छात्राओं के लिए अलग-अलग सर्व-सुविधायुक्त छात्रावास की व्यवस्था की गई है, जहाँ कुशल छात्रावास अधीक्षक-अधीक्षिकाओं के संरक्षण व मार्गदर्शन में विद्यार्थी लक्ष्य-प्राप्ति हेतु निरंतर अध्ययनरत हैं। विद्यालय की भोजन-व्यवस्था स्वयं में एक उदाहरण है, जहाँ स्वादिष्ट व स्वास्थ्यवर्धक शाकाहारी भोजन विद्यार्थियों को प्रदान किया जाता है। युगांतर परिवार के सभी सदस्य विद्यार्थियों को आज के माहौल के अनुरुप ढालने व राष्ट्र के नव निर्माण में अपना योगदान प्रदान करने योग्य बनाने हेतु कृत-संकल्पित हैं।हम केवल आशा नहीं करते, बल्कि हमें यह पूर्ण विश्वास है कि हमारे विद्यार्थी अपने प्रयास से एक नया सूरज उदित करेंगे, जिसके प्रकाश से संपूर्ण विश्व आलोकित होगा और हम अपने खोए हुए गौरव ‘विश्व-गुरु‘ को प्राप्त करने में सफल होंगे।

विद्यालय के 17 वर्षों की यात्रा में जिन पालकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, छात्रावास के अधीक्षकों व कर्मचारियों, मेस व परिवहन व्यवस्था के संयोजकों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से अपना योगदान दिया है, हम उनके आभारी हैं और उम्मीद करते हैं कि भविष्य में भी उनका इसी तरह से योगदान हमें प्राप्त होता रहेगा। अंततः मैं इतना जरुर कहना चाहूँगा-

"वह देखो दूर खड़ी मंजिल इंगित कर हमें बुलाती है, साहस से बढ़ने वालों को हँसकर गले लगाती है।"

Vinay Dadha

(Chairman)